• थार के मरुस्थल की उत्पत्ति चतुर्थक महाकल्प ( नूतन महाकाल / नियोजोइक एरा ) के प्लीस्टोसीन काल मे टेथिस सागर के अवशेष के रूप में हुई है ।
मरुस्थलीय प्रदेश का विस्तार -
• जिले - 12 , बाड़मेर ,जैसलमेर, बीकानेर ,जोधपुर , पाली ,जालौर , नागौर , सिरोही, चुरू , झुंझुनू , हनुमानगढ़, गंगानगर ।
• इसका संपूर्ण विस्तार लगभग 1,75,000 वर्ग किलोमीटर है ।
• जनसंख्या - 40%
• क्षेत्रफल - 61.11%
• ऊंचाई - 200 300 मीटर
• चौडाई - 300 km
• लंबाई - 640 km
थार के मरुस्थल की प्रमुख विशेषताएं -
1. थार का मरुस्थल क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का 17th सबसे बड़ा मरुस्थल है ।
2. थार का मरुस्थल भारत में उपस्थित निम्न वायु केंद्र है, जो भारतीय उपमहाद्वीप में मानसून को आकर्षित करता है तथा ऋतु चक्र को नियमिन करता है ।
3. थार के मरुस्थल में रेतीली बलुई मृदा ( एंटिसोल ) की प्रधानता है ।
4. थार के मरुस्थल में मरुउद्द्भिद् वनस्पति ( जीरोफाइट्स ) पाई जाती है ।
5. थार के मरुस्थल में अवसादी चट्टानें की प्रधानता है । जीवाश्म खनिज ( कोयला , पेट्रोलियम , प्राकृतिक गैस ) के भंडार पाए जाते हैं।
6. थार के मरुस्थल की मुख्य नदी लूनी नदी है इसका ढाल उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम में है।
7. थार का मरुस्थल राजस्थान में न्यूनतम जनघनत्व वाला भौतिक प्रदेश है।
8. थार का मरुस्थल विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या एवम् जैवविविधता वाला मरुस्थल है।
कारण - जलवायु , तटीय सीमा का अभाव , ठंडी महासागरीय धारा का नहीं गुजरना।
थार के मरुस्थल का वर्गीकरण -
थार के मरुस्थल को अध्ययन की दृष्टि से दो भागों में विभक्त किया जाता है-
1. शुष्क मरुस्थल - 0-25 cm वर्षा
2. अर्ध्दशुष्क मरुस्थल - 25-50 cm वर्षा
नोट - 25 cm सम वर्षा रेखा मरुस्थल को शुष्क मरुस्थल और अर्ध्दशुष्क मरुस्थल को अलग-अलग विभक्त करती है ।
A) शुष्क मरुस्थल - 25 सेंटीमीटर से कम वर्षा वाले भौतिक प्रदेश।
शुष्क मरुस्थल को दो भागों में बांटा जाता है -
a) बालुका स्तूप मुक्त - 41.5%
b)बालुका स्तूप युक्त - 58.5%
बालुका स्तूप - जब हवा के द्वारा मृदा का निक्षेपण होता है तो उससे बनने वाली स्थलाकृति को बालुका स्तूप कहते हैं ।
बालूका स्तूप के प्रकार -
राजस्थान में 6 प्रकार के बालूका स्तूप पाए जाते हैं, जो कि निम्न प्रकार से हैं -
1. अनुदैर्ध्य/रेखीय/पवननानूवर्ती बालूका स्तूप
2. अनुप्रस्थ/अवरोधी बालुका स्तूप
3. बरखाना/ अर्धचंद्राकार बालुका स्तूप
4. तारा बालुका स्तूप
5. शब्र काफीज बालुका स्तूप
6. पैराबोलिक बालुका स्तूप
1. अनुदैर्ध्य/रेखीय/पवननानूवर्ती बालूका स्तूप
• यह पवन की दिशा के समांतर या अनुदिश बनने वाले बालूका स्तूप।
• अन्य नाम - सीप , अलब।
• राजस्थान में पाई जाने वाली सबसे ऊंचे बालुका स्तूप ( 10-50 मीटर )
• विस्तार - जैसलमेर ( सर्वाधिक ) बाड़मेर , बीकानेर , पश्चिम जोधपुर।
2. अनुप्रस्थ/अवरोधी बालुका स्तूप
• यह पवन की दिशा के लंबवत या समकोण पर बनने वाले बालूका स्तूप।
• विस्तार - पोकरण (जैसलमेर) , बालोतरा , रावतसर (हनुमानगढ़ ) , सीकर, झुंझुनू , नागौर , जोधपुर।
3. बरखाना/ अर्धचंद्राकार बालुका स्तूप
• थार के मरुस्थल में पाए जाने वाले गतिशील अर्धचंद्राकार बालुका स्तूप।
• 10 से 20 मीटर ऊंचाई तथा 100 से 200 मीटर चौड़ाई तक विस्तृत होते हैं।
• पश्चिमी राजस्थान में मरुस्थलीकरण के लिए सर्वाधिक उत्तरदायी बालुका स्तूप।
• विस्तार - पालेरी ( चूरू ) , सीकर, सूरतगढ़ , जैसलमेर, लूणकरणसर, देशनोक, बाड़मेर ,ओसिया जोधपुर।
4. तारा बालुका स्तूप
• यह बालुका स्तूप श्रृंखलाबद्ध होते हैं।
• 10 से 25 मीटर तक ऊंचे।
विस्तार - पोकरण , सोहनगढ़ ( जैसलमेर ) , सूरतगढ़ (श्री गंगानगर)
5. शब्र काफीज बालुका स्तूप
• झाड़ियों तथा घास के पास में होते हैं ।
• विस्तार - पश्चिम राजस्थान में।
6. पैराबोलिक बालुका स्तूप
• विस्तार - सभी जगह जहां मरूस्थल क्षेत्र है ।
नोट - पुरे मरूस्थल क्षेत्र में बालुका स्तूप रहित क्षेत्र जैसलमेर के दक्षिण में स्थित आकल वुड फालिस पार्क हैं ।
मरुस्थल प्रदेश का भौतिक प्रदेशों में विभाजन इस प्रकार से है -
A) घग्घर का मैदान ।
B) शेखावाटी प्रदेश।
C) शुष्क रेतीला प्रदेश ।
D) लूनी - जवाई बेसिक।
A) घग्घर का मैदान -
विस्तार - गंगानगर , हनुमानगढ़ ।
• नाली - घग्घर का तल को स्थानीय भाषा में नाम ।
• यह पुरा क्षेत्र समतल मैदानी है तथा वर्तमान में यह क्षेत्र सिंचाई के क्षेत्र में विस्तार के कारण राज्य का प्रमुख उत्पादक अग्रणी क्षेत्र बना हुआ है ।
• घग्घर नदी का हनुमानगढ़ , सूरतगढ़ , अनूपगढ़ से होते हुए पाकिस्तान में चली जाती है ।
• घग्घर नदी को मृत नदी भी कहा जाता है ।
B) शेखावाटी प्रदेश
• इस प्रदेश को बागड़ प्रदेश भी कहा जाता है ।
• इसका विस्तार सीकर , झुंझुनू , चूरू एवम् नागौर जिले का उत्तरी भाग में है ।
• इस प्रदेश में मध्य तथा कम ऊंचाई के बालूका का स्तूप है , शेष प्रदेश में रेतीला मैदानी भाग है ।
• इस प्रदेश में मेघा , कातली व रूपनगढ़ प्रमुख नदियां है जो अंतः प्रवाही नदी है ।
• इस प्रदेश में अनेक लवणीय झीले पाई जाती है जिसमें डेगाना , ताल छापर , सुजानगढ़, डीडवाना, कुचामन आदि प्रमुख हैं ।
• इस क्षेत्र में अधिकांश बालुका स्तूप अर्धचंद्राकार है ।
• साम्भर झील - 25 किलोमीटर लंबी और 10 किलोमीटर चौड़ाई यह झील जयपुर जिले में स्थित है , जो आपने नमक उत्पादन के लिए पूरे भारतवर्ष में प्रसिद्ध है ।
C) शुष्क रेतीला प्रदेश
• इसका विस्तार जैसलमेर , बाड़मेर , बीकानेर , जोधपुर तथा चुरू जिले के पश्चिमी भाग में है।
• इस प्रदेश में 10 से 25 मीटर ऊंचाई तक बालूका स्तूप बहुत अधिक में विस्तार देखा जा सकता है ।
• यह क्षेत्र वास्तविक मरुस्थली प्रदेश के अंतर्गत आता है जिसमें लगभग सभी प्रकार के बालुका स्तूप देखने को मिलते हैं ।
• इस प्रदेश में चूना पत्थर , ग्रेफाइट , सेंड स्टोन भी पाया जाता है।
• इसमें स्थाई रूप से बालुका स्तूप भी विद्यमान है परंतु स्थानांतरित होने वाले बालुका स्तूप की संख्या अधिक है।
D) लूनी - जवाई बेसिक -
• इस को भू - भाग को गोडवार प्रदेश के नाम से भी जाना जाता है।
• इस क्षेत्र का विस्तार जालौर , सिरोही , जोधपुर , पाली नागौर के दक्षिणी भाग में है ।
• लूनी नदी अजमेर के निकट अरावली पर्वत से निकलकर दक्षिणी पश्चिमी क्षेत्र में प्रवाहित होती है तथा इसके बाद वह अंतिम रूप से कच्छ के रण में विलीन हो जाती है ।
• लूनी नदी अपने अपवाह तंत्र से एक जलोढ़ मैदान का निर्माण करती है जिसे लूनी बेसिन के नाम से जाना जाता है ।
• लूणी लूनी नदी के प्रवाह में कुछ क्षेत्रों की भूमि लवणीय होती है जिसके कारण यह नदी खारी हो जाती है । ( बालोतरा के आसपास )
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