मेवाड़ का इतिहास
• मेवाड़ का विस्तार - उदयपुर ,चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा तथा प्रतापगढ़ जिलो में है ।
• मेवाड़ के प्राचीन नाम - मेदपाट , प्राग्वाट तथा शिवि जनपद था ।
• मेवाड़ में गूहिल वंश का शासन था । इस वंश की 24 शाखाएं का उल्लेख मूहणौत नैणसी और कर्नल टाॅड ने किया है ।
• गूहिल सूर्यवंशी हिंदू शासक थे तथा यह वंश दीर्घकालीन शासन करने वाला राजवंश हैं ।
गूहिल - 566 ईस्वी
• अबुल फजल के अनुसार - ईरान के राजा नौशेरवा खां आदिल के वंशज ।
• कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार - वल्लभ ( गुजरात ) के शासक शिलादित्य का पुत्र माना जाता है तथा गूहिल की माता का नाम पुष्पावती था।
• 1869 में आगरा से गुहिल के 2000 चांदी सिक्के मिले थे इससे मुद्रा प्रणाली का पता चलता है।
• गौरी शंकर हीराचंद ओझा के अनुसार 566 ईस्वी में गूहिल ने शासन स्थापित किया।
बप्पा रावल - 734 से 753 ईस्वी
• गुरु - हरित ऋषि
• मानमोरी को हराकर 734 ईस्वी में चित्तौड़ पर अधिकार किया [ राज प्रशस्ति में इसका उल्लेख ]
• राजधानी - नागदा , उदयपुर
• गौरीशंकर ओझा के अनुसार बप्पा रावल का वास्तविक नाम कालभोज था ।
• कैलाशपुरी में एकलिंग जी का मंदिर बनाया।
• मेवाड़ के शासक स्वयं को एकलिंग जी के दीवान मानते हैं।
• बप्पा रावल ने गजनी (अफ़गानिस्तान) में मुस्लिम सेना को हराया तथा वहां पर अपने भांजे को राजा बना दिया।
•चिंतामणि विनायक वैद्य ने बप्पा रावल की तुलना " चार्ल्स मार्टेल " से की है।
[ चार्ल्स मार्टेल - फ्रांसीसी सेनापति , इसने यूरोप में सर्वप्रथम मुस्लिम आक्रमणकारी को हराया। ]
• बप्पा रावल का 115 ग्रैन सोने का सिक्का मिला था।
•श्यामल दास ने अपने ग्रंथ वीर विनोद में कहा - "बप्पा नाम नहीं, अपितु उपाधि " हैं।
• बप्पा रावल की उपाधियां - हिंदूआ सूरज , राजगुरु तथा चक्कवै है।
• बप्पा रावल को कुंभलगढ़ प्रशस्ति ( 1460) में विप्र बताया है।
अल्लट / आलू रावल
• वराह मंदिर का निर्माण।
• आहट (उदयपुर ) को दूसरी राजधानी बनाया।
• मेवाड़ में प्रशासनिक व्यवस्था की स्थापना की।
• हुण राजकुमारी हरिया देवी से विवाह ( राजस्थान का प्रथम विदेशी विवाह )
• हरिया देवी ने हर्षपुर नामक गांव की स्थापना की।
शक्ति कुमार [971-93]
• शक्ति कुमार के समय परमार वंश के शासक मु॑ज ने आहड़ पर आक्रमण करके उसे नष्ट कर दिया था तथा चितौड़ पर अधिकार कर दिया।
• मुंज के उत्तराधिकारी राजा भोज ने मेवाड़ में त्रिभूवन नारायण मंदिर का निर्माण करवाया।
कर्ण सिंह/ रणसिंह [ 1058 ईस्वी ]
• इनके पुत्र क्षेमकरण ( रावल शाखा का प्रारंभ ) और माहप ( रावल शाखा का प्रारंभ )।
जैत्र सिंह [ 1213-1253 ]
• भुताला का युद्ध [ 1227 ] - भूताला नामक स्थान उदयपुर जिले में स्थित है।
• यह युद्ध जैत्रसिंह तथा दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश के मध्य हुआ था।
• जैत्रसिंह इस युद्ध में विजय हुआ यह जानकारी जयसिंह सूरी की पुस्तक " हम्मीर मदमर्दन " से प्राप्त होती है।
• इल्तुतमिश की सेना जब युद्ध हार गई तो लौटती हुई सेना ने नागदा को लूटा था इस कारण से जैत्र सिंह ने नागदा से राजधानी चित्तौड़ को बना दिया। पहले चित्तौड़ परमारो के अधीन था।
• जैत्रसिंह के दो प्रमुख सेनापति जिनका नाम मदन और बालक था ।
• डॉ दशरथ शर्मा ने जैत्र सिंह के शासनकाल को मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्ण काल मानते हैं।
• गौरीशंकर हीराचंद ओझा इनका शासन काल 1213 से 1253 मानते हैं तथा इनको प्रतापी , बलवान राजा कहा।
• जैत्रसिंह के पुत्र तेजसिंह का विवाह जालौर के चौहान शासक उदयसिंह की पौत्री के साथ किया गया।
चौहान व गूहिल वंश के मध्य वैवाहिक संबंध स्थापित हुआ।
तेज सिंह [ 1250 - 1273 ]
• इसके शासनकाल में कमलचन्द्र द्वारा 1260 ईस्वी में मेवाड़ का प्रथम चित्रित ग्रन्थ " श्रावण प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णी ' की रचना की।
• तेजसिंह की रानी जेतल देव ने चित्तौड़गढ़ में श्याम पार्श्व मंदिर का निर्माण करवाया।
• इनके शासनकाल में दिल्ली के सुल्तान बलबन ने असफल आक्रमण किया।
समर सिंह [ 1273-1301 ]
• इनके शासनकाल में शुभ चंद्र द्वारा आबू के अचलेश्वर शिलालेख की स्थापना की गई थी, जिसमें समर सिंह तक के मेवाड़ शासकों का उल्लेख मिलता है।
• दिल्ली के शासन अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध में जाते समय कर वसूला था।
• इनके पुत्र कुंभकर्ण ने नेपाल में गूहिल वंश की स्थापना की थी।
रावल रतन सिंह [ 1301-1303]
• रावल शाखा का अंतिम शासक।
• 1303 में दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया।
अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के कारण
• राजनीतिक महत्वाकांक्षा - अमीर खुसरो के अनुसार ( खजाईन- उन-फुतुह)
• पद्मिनी को प्राप्त करना - मलिक मोहम्मद जायसी ( पद्मावत में - 1540 में इस ग्रंथ की रचना शेरशाह सूरी के समय अवधी भाषा में की गई थी )
• चित्तौड़ की व्यवहारिक उपयोगिता।
• चित्तौड़ का सामरिक महत्व।
• इस आक्रमण के समय ( 26 अगस्त 1303 ) और चित्तौड़ का प्रथम साका तथा राजस्थान का द्वितीय साका हुआ।
• रानी पद्मिनी 1600 अन्य महिलाओं के साथ जौहर कर लिया।
• रावल रतन सिंह और उनके सेनापति गोरा और बादल युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।
जौहर - रानी पद्मिनी।
केसरिया - रावल रतन सिंह।
• गूहिल वंश की रावल शाखा के अंतिम शासक रावल रतन सिंह थे।
• चित्तौड़ दुर्ग पर अलाउद्दीन खिलजी ने अधिकार कर लिया तथा गुस्से में 30,000 निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
• अमीर खुसरो ने अपने ग्रंथ " तारीख ए अलाई " ( खजाइन उल फूतूह ) ने इस युद्ध का आंखों देखा वर्णन किया है।
• अलाउद्दीन खिलजी ने किले को अपने पुत्र खिज्र खां को सौंप दिया तथा इस दुर्ग का नाम खिज्राबाद रख दिया।
• 1325 ईस्वी के चित्तौड़ के धाईबी पीर की दरगाह के फारसी अभिलेख में चित्तौड़ का नाम खिज्राबाद मिलता है।
• 1311 के बाद में जालौर के कान्हडदेव का भाई मुॅ॑छाला मालदेव को चितौड़ का प्रशासक नियुक्त कर दिया।
पद्मिनी - मलिक मोहम्मद जायसी के ग्रंथ पद्मावत के अनुसार -
• सिहल द्वीप की राजकुमारी।
• पिता - गंधर्वसेन
• माता - चंपावती
• तोता - हीरामन
• राघव चेतन के द्वारा पद्मिनी की सुंदरता को अलाउद्दीन खिलजी को बताया।
• सूर्यमल्ल मिसण ने इस ग्रंथ की बात को स्वीकार नहीं किया।
• 2018 में फिल्म - पद्मावत
निर्देशक - संजय लीला भंसाली
अभिनय - रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण।
राणा हम्मीर (1326 से 1364 )
• हम्मीर सिसोदा (राजसमंद) का सामंत था तथा हम्मीर से ही गूहिल वंश की सिसोदिया शाखा प्रारंभ हुई थी।
• मेवाड़ में राणा शाखा का प्रथम शासक था।
उपाधि -
• वीर राजा - रसिकप्रिया में।
• मेवाड़ का उद्धारक।
• विषम घाटी पंचानन - कुंभलगढ़ प्रशस्ति में।
• प्रबल हिंदू - कर्नल जेम्स टॉड ने।
विजय अभियान -
• मालदेव सोनगरा के पुत्र बनवीर/जैसा को हराकर चित्तौड़गढ़ अधिकार ( 1326 ईस्वी )
• मोहम्मद बिन तुगलक को पराजित - सिंगोली (बांसवाड़ा ) के युद्ध में।
निर्माण कार्य -
• बरवड़ी/अन्नपूर्णा माता का मंदिर - चित्तौड़ में
• मेवाड़ के गुहिल वंश की इष्ट देवी।
महाराणा खेता/क्षेत्र सिंह (1364-82)
• खेता के शासन काल से ही मेवाड़- मालवा संघर्ष आरंभ हुआ था।
• खेता ने मालवा के शासक दिलावर खां को पराजित किया था।
महाराणा लाखा ( 1382 - 1421 )
• लाखा के समय पिच्छु नामक चिड़ीमार बंजारा ने पिछोला झील ( उदयपुर ) का निर्माण करवाया।
• लाखा के काल में ही जावर (उदयपुर) में चांदी व जस्ते की खानों की जानकारी प्राप्त हुई।
• पिछोला झील के पास " नटनी का चबूतरा " बनाया।
• लाखा ने बूंदी के नकली तारागढ़ दुर्ग को जीता था , कुंभा हाड़ा (राणा लाखा का साला) नकली बूंदी तारागढ़ दुर्ग के की रक्षा करते हुए मारा गया था।
• महाराणा लाखा ने मारवाड़ के राव चूण्ड़ा राठौड़ की पुत्री हंसाबाई से विवाह किया था।
• इस समय लाखा के बड़े बेटे चूण्ड़ा ने प्रतिज्ञा की वह मेवाड़ का अगला राजा नहीं बनेगा बल्कि हंसा बाई का बेटा मेवाड़ का अगला राजा बनेगा इसलिए चूण्ड़ा को " मेवाड़ का भीष्म " का जाता है।
राणा चूण्ड़ा के मेवाड़ के शासक त्याग के कारण उससे कई विशेषाधिकार दिए गए थे -
• मेवाड़ के प्रथम श्रेणी के चार ठिकाने - सलूंबर, आमेट, देवगढ़, बैंगू दिए गए थे।
• मेवाड़ के राणा की अनुपस्थिति में सलूंबर का सामान राजधानी को संभालेगा।
• मेवाड़ के सभी राजपत्रों पर राणा के साथ-साथ सलूंबर का सामन्त भी हस्ताक्षर करेगा।
• सलूंबर का सामंत मेवाड़ के राजा का राजतिलक करेगा।
• सलूंबर का सामंत मेवाड़ की सेना का सेनापति होगा।
नोट - सलूंबर मेवाड़ का सबसे बड़ा ठिकाना था।
महाराणा मोकल ( 1421 - 33 )
• पिता -राणा लाखा , माता - हंसाबाई ।
• पहला संरक्षक - चूण्ड़ा ।
• हंसाबाई के अविश्वास के कारण चूण्ड़ा मेवाड़ छोड़कर मालवा चला गया तथा वहां मांडू के शासक होशंगशाह की सेना में नियुक्त हो गया।
• दूसरा संरक्षक - रणमल राठौड़ (हंसाबाई का भाई)
निर्माण कार्य -
• एकलिंग जी मंदिर के परकोटे का निर्माण करवाया।
• त्रिभुवन नारायण मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया जिससे समिदेश्वर मंदिर अथवा मोकल मंदिर भी कहा जाता है।
• चित्तौड़ में जलाश्य सहित द्वारकानाथ (विष्णु) मंदिर का निर्माण करवाया।
युद्ध -
• रामपुरा का युद्ध ( 1428) - नागौर के शासक फिरोज खां को पराजित किया।
• जिलवाड़ा (राजसमंद) का युद्ध (1433) - गुजरात के अहमदशाह ने मेवाड़ पर आक्रमण किया। इस समय चाचा, मेरा तथा महपा पंवार ने दिलवाड़ा नामक स्थान पर मोकल की हत्या कर दी।
* मोकल की मृत्यु के बाद में अहमदशाह से युद्ध रानी कमलावती ने किया।
महाराणा कुंभा ( 1433 - 1468 )
• माता - सौभाग्यवती
• पिता - महाराणा मोकल
महाराणा कुंभा की उपाधियां -
• अभिनव भरताचार्य - संगीत में विव्द्ता कारण
• हिंदु सुरताण - हिंदुओं का रक्षक
• टोडरमल - संगीत के 3 विधाओं में पारंगत होने के कारण।
• हालगुरु - पहाड़ी क्षेत्र का शासक होने के कारण
• छापगुरु - छापामार युद्ध पद्धति अपनाने के कारण
• राणा रासो • राणो राय
• नाटकराज कर्ता
• परम भागवत, आदि वराह , कविराज, शैल गुरु, नरपति
• रणमल राठौड़ ( जोधपुर) की सहायता से राणा कुंभा ने अपने पिता की हत्या का बदला लिया ( चाचा , मेरा को मार दिया तथा महपा , एक्का भाग गए)
• हंसाबाई ने चूण्ड़ा को मालवा से वापस बुला लिया|
• भारमली की सहायता से रणमल राठौड़ को मार दिया गया।
• रणमल का बेटा जोधा भाग गया तथा उसने बीकानेर के पास काहुनी गांव में शरण ली।
महाराणा कुंभा के प्रमुख निर्माण कार्य -
• कुंभ को मेवाड़ के स्थापत्य का जनक भी माना जाता है।
• श्यामल दास ने अपने ग्रंथ वीर विनोद में कुंभा के मेवाड़ क्षेत्र में 84 दुर्गा में से 32 दुर्ग का निर्माता माना जाता है।
• कुंभा के काल को मेवाड़ का स्वर्ण काल माना जाता है।
[1] कुंभलगढ़ दुर्ग -
