राजस्थान के प्रमुख त्यौहार । Rajasthan ke festival .

0

राजस्थान के प्रमुख त्यौहार
राजस्थान के प्रमुख त्यौहार

"भारत के विभिन्न धर्मों की प्रमुख त्योहार एवं इसकी विशेषताएं । राजस्थान में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार एवं उनकी विशेषताएं । हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई जैन सिंधी के प्रमुख त्यौहार ।

इस पोस्ट के माध्यम से हम राजस्थान के 
विभिन्न त्यौहार एवं पर्व की विशेषता के बारे में जानेंगे । हमें उम्मीद है कि इस पोस्ट के माध्यम से आपको समझने में आसानी होगी । 

               हिंदू धर्म के प्रमुख त्यौहार
हिन्दू धर्म के प्रमुख त्यौहार
हिंदू धर्म के प्रमुख त्यौहार

हिन्दू के महिने
1. चैत्र       2. वैशाल  3. श्रेष्ठ
4. आषाढ़   5. श्रावण   6.भाद्रपद
7. आश्विन   8. कार्तिक  9. मार्गशीर्ष
10. पौष   11. माघ     12. फाल्गुन
 
- प्रत्येक माह में 2 पक्ष होते हैं । 
• कृष्ण पक्ष (1 to 15 )
अंतिम दिन -अमावस्या

• शुक्ल पक्ष (16 to 30 )
 अंतिम दिन - पूर्णिमा 

नव वर्ष - चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
• वर्ष का अंतिम दिन - चैत्र अमावस्या
 
छोटी तीज :-

- यह त्योहार श्रावण शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है।

 “तीज की सवारी, पिया घणी लागै प्यारी "

- इस त्योहार से राजस्थान में त्योहारों का आरम्भ होता है।
- इसे श्रावणी तीज/ हरियाली तीज भी कहा जाता है।
- यह महिलाओं का प्रमुख त्यौहार है उस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए तथा अविवाहित अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती है। 
- इस दिन सावन ऋतु तथा श्रृंगार के गीत गाये जाते हैं ।
• जयपुर में तीज माता की सवारी निकाली जाती है।

रक्षाबन्धन :- यह श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है । जिसे सत्य पूर्णिमा और नारियल पूर्णिमा भी कहा जाता है।
•यह भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है इस दिन बहने अपने भाई की हाथों की कलाई पर राखी बाँधती है।
• इस दिन घर के द्वार पर श्रावण कुमार के चित्र बनाकर उनकी पूजा की जाती है।

                                  भाद्रपद माह के त्यौहार
भाद्रपद माह के त्यौहार
   भाद्रपद माह के त्यौहार

                    भाद्रपद कृष्ण पक्ष के त्यौहार

बड़ी तीज :-  यह भाद्रपद कृष्ण तृतीया को मनाया जाता है, इसे कजली तीज/ भादुड़ी तीज/ सातुड़ी तीज/ बूढ़ी तीज भी कहा जाता है।
- यह त्यौहार बुन्दी जिले का प्रसिद्ध है ।
- उस दिन नीम की पूजा करके महिलाएँ तीज माता की कहानी सुनती है। 
- यह महिलाओं का प्रमुख त्योहार है विवाहित महिलाएं अपने पति को दीर्घ आयु के लिए तथा अविवाहित अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती है।

ऊब छह :- यह त्योहार भाद्रपद कृष्ण षष्ठी को मनाया जाता है।
- इसे चंदन व्रत षष्ठी भी कहा जाता है। उस दिन उपवास किया जाता है। 
- सांयकाल से चन्द्रोदय तक महिलाएं खड़ी रहती है। तत्पश्चात् चढ़मा को अर्ध्य देकर व्रत खोलती है।

हल षष्ठी :- यह त्योहार भगवान कृष्ण के भाई बलराम के जन्मोत्सव के रूप में भाद्रपद कृष्ण षष्ठी को मनाया जाता है। 
- इस दिन हल की पूजा की जाती है। 
• गाय के दूध व दही का सेवन नहीं किया जाता है। 
इस दिन पुत्रवती स्त्रियां व्रत रखती है।

कृष्ण जमाष्टमी :- भगवान कृष्ण के जन्म दिवस के रूप में यह त्यौहार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है।
• जन्माष्टमी का मेला - नाथद्वारा (राजसमंद)
- इस दिन मदिरो में झांकियां सजाई जाती हैं।
- उस दिन उपवास भी किया जाता है।

गोगा नवमी :- भाद्रपद कृष्ण नवमी। 
 •गोगाजी की पूजा।
• गायों की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त ।
मेला -  ददेरवा , चुरू और गोगामेड़ी, हनुमानगढ़ ।

बछ बारस - भाद्रपद कृष्ण 12 ।
-गाय व बछड़ो की पूजा की जाती है।
- इस दिन पुत्रवती स्त्रियाँ पुत्र की मंगल कामना के लिए व्रत रखती है।
- इस दिन गाय के दूध व दही का सेवन नहीं किया जाता है।
- उस दिन चाकू से कटी वस्तुओं का भोग नहीं किया जाता है।

सतिया अमावस्या - भाद्रपद अमावस्या
-इस दिन सतियों की पूजा की जाती है।
•राणी सती का मेला - झुंझुनू

              भाद्रपद शुक्ल पक्ष के त्यौहार

हरियाली तीज - भाद्रपद शुक्ल तृतीया ।
- शिव व पार्वती की पूजा ।
- 13 प्रकार के व्यंजन बनाये जाते है।

गणेश चतुर्थी :- भाद्रपद शुक्ल चर्तुथी
• अन्य नाम - शिवा चतुर्थी व चतरा चौथ।
- गणेश जी जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है ।
- महाराष्ट्र का प्रमुख त्योहार है।
- इस दिन लड़कों के लिए सिजांश भेजा जाता है।
- मुलतः यह छोटे-छोटे बच्चों का पर्व है।

• त्रिनेत्र गणेश मेला - रणम्भौर दुर्ग में ।

ऋषि पंचमी :- यह भाद्रपद शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है ।
- उस दिन गंगा स्नान तथा सप्त ऋषि पुजन का विशेष महत्व है।
- इस दिन माहेश्वरी समाज में राखी का त्यौहार मनाया जाता है।

राधाष्टमी :- राधा के जन्म दिवस के रूप में यह भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को मनाया जाता है।
- इस दिन निम्बार्क सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ सलेमाबाद (अजमेर) में मेला भरता है।

तेजा दशमी :- भाद्रपद शुक्ल दशमी । 
- नागों के देवता के रूप में पूजा जाता है ।
• मेला - खरनाल , नागौर

देवझुलनी /जल झूलनी एकादशी :- 
- इस दिन ठाकुर जी / देव मूर्तियों को बेवाण या विमान या पालकियों में बैठाकर शाही स्नान करवाई जाती है ।
• मेला -चारभुजानाथ मंदिर , गढ़बोर , राजसमंद ।

                            आश्विन मास के त्यौहार 
आश्विन मास के त्यौहार

आश्विन मास के त्यौहार 

श्राद्ध पक्ष :- भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक (16 दिनों तक ) सर्वपितृ श्राद्ध पक्ष चलता है।
- बुर्जुगों की मृत्यु तिथि के दिन श्रद्धापूर्वक तर्पण और बाहाणों को भोजन करवाना श्राद्ध कहलाता है।

सांझी :- भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक । 
- कुँवारी कन्याएँ साझियाँ बनाती है तथा पूजा करती है।
-साँझीयाँ नाथद्वारा (राजसमन्द) की प्रसिद्ध है ।
      
            आश्विन मास शुक्ल पक्ष के त्यौहार 

शरदीय नवरात्रा :- आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक शरदीय नवरात्रा मनाते जाते हैं । 
- शक्तिपीठ के रूप में माँ दुर्गा की 9 दिनों तक 9 रूपों की पूजा की जाती है।
1. शैलपुत्री       2. बहाचारिणी
3. चन्द्रघंटा       4. कृष्णमंडा
5. स्कद्रमाता     6. कात्यायनी माता
7. कालरात्री       8. महागौरी
9. दुर्गा माता

दुर्गा अष्टमी :- आश्विन शुक्ल अष्टमी के दिन मनाये जाने वाले इस त्योहार को वीर अष्टमी तथा माता अष्टमी भी कहा जाता है।
- सम्पूर्ण में बंगाल में त्योहार हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
- इस दिन शस्त्र मुजन किया जाता है।
-8 कन्याओं की पूजा करके उन्हें भोजन करवाया जाता है।
- माँ दुर्गा की विशेष रूप से पूजा अर्चना की जाती है।

दशहरा :- आश्विन शुक्ल दशमी / विजय दशमी ।
-उस दिन राम ने रावण का वध किया अर्थात अच्छाई की बुराई पर विजय प्राप्त हुई।
- उस दिन सूर्यास्त होते ही रावण, मेघनाथ व कुंभकरण के पुतले जलाये जाते हैं।
- उस दिन शमी (खेजड़ी) शस्त्र तथा शास्त्रों की पूजा की जाती है।
- इस दिन लीलटांस पक्षी के दर्शन करना शुभ माना जाता है।
• प्रसिद्ध मेले - 
मैसुर - कनार्टक , कुल्लू - हिमाचल प्रदेश कोटा - राजस्थान ।
• दशहरा महोत्सव - जयपुर 
• भगवान् राम की सवारी - मेहरानगढ़ दुर्ग ( जोधपुर )

शरद पूर्णिमा :- आश्विन पूर्णिमा
• अन्य नाम - राम पूर्णिमा
- शरद पूर्णिमा सबसे सर्वश्रेष्ठ पूर्णिमा का पर्व है।
- इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है।

                          कार्तिक माह के त्यौहार 
कार्तिक माह के त्यौहार
कार्तिक माह के त्यौहार 


करवा चौथ - यह कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाने वाला महिलाओं सर्वाधिक लोकप्रियप्रिय त्यौहार है।
- इस दिन सुहागन स्त्रियाँ व्रत रखती है तथा अपने पति की दीर्घायु की मंगलकामना करती है ।

अहोई अष्टमी :- यह त्यौहार कार्तिक कृष्ण अष्टमी के दिन मनाया जाता हैं ।
- इस दिन पुत्रवती स्त्रियां निर्जल व्रत रखती है और दीवार पर स्याऊ माता व उनके बच्चे बनाये जाते हैं।

धनतेरस - कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन धनवंतरी वैध के जन्म दिवस के रूप में यह त्योहार मनाया जाता है।
- इस दिन यमराज की पूजा की जाती है तथा नये बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

रूप चतुर्दशी :- यह पर्व कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन मनाया जाता है जिसका सम्बध स्वच्छता व सौदर्यता से है। उसे छोटी दीपावली का त्योहार भी कहा जाता है।

दिपावली :- हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्योहार है, जो कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। 
- इस दिन भगवान राम चौहद वर्ष का वनवास काटकर सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे तथा भगवान राम का स्वागत घी के दीपक जलाकर किया 
• अतः से दीपों का पर्व का पर्व कहा गया ।
- यह लक्ष्मी का पर्व भी है सायंकाल में लक्ष्मी जी का पूजन भी किया जाता है ।
 - वेश्य लोग इस दिन अपना बही खाता बदलते हैं ।

गोवर्धन पूजा :- कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन प्रातः काल गाय के गोबर से गोवर्धन पूजा की जाती है तथा 56 प्रकार के अन्नकूट का भोग मंदिर लगाया जाता है।

अनकूट महोत्सव :- अन्नकूट महोत्सव वल्लभ सम्प्रदाय में मनाया जाता है । 
• नाथद्वारा (राजसमन्द्र) का यह महोत्सव भारत भर में प्रसिद्ध है। 
• वहाँ भीलों की लूट प्रसिद्ध है।

भैया दूज :- यह त्यौहार कार्तिक शुक्ल द्वितीया के मनाया जाता है जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है।
• यह भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक त्योहार है। । 
-उस दिन बहने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनके मंगलमय जीवन की कामना करती है।

गोपाल अष्टमी :- कार्तिक शुक्ल अष्टमी • • गाय व बछड़ों की पूजा की जाती है ।
- गाय के दूध व दही का प्रयोग नहीं किया जाता है।

अक्षया नवमी :- आँवली नवमी / कार्तिक शुक्ल नवमी .
-आंवला के वृक्ष की पूजा / व्रत किया जाता है।

देवऊठनी एकादशी - कार्तिक शुक्ल एकादशी ।
 • देव प्रबोधिनी एकादशी / तुलसी एकादशी
• भगवान् विष्णु जाग्रत अवस्था में आते हैं 
• मांगलिक कार्य आरम्भ, तुलसी और सालिगराम का विवाह ।


                 माघ के प्रमुख त्योहार
माघ के प्रमुख त्योहार
माघ के प्रमुख त्योहार

तिल चौथ :- माघ कृष्ण चर्तुथी के दिन मनाये जाने वाले इस त्योंहार को संकट चौथ भी कहा जाता है।
- उस दिन गणेश जी तथा चौथ माता के तिल कट्टे का भोग लगाया जाता है ।
• चौथ का बरवाड़ा ( सवाई माधोपुर ) में उस दिन चौथ माता का मेला भरता हैं।

षट्तिला एकादशी - माघ कृष्ण एकादशी के दिन यह त्यौहार मनाया जाता है। 
- इस पर्व के अधिदेवता भगवान् विष्णु हैं ।
 - 6 प्रकार के तिलों के प्रयोग होने होने के कारण उसे षट्तिला एकादशी 8 एकादशी कहा जाता है ।
- इस दिन काली गाय व काले तिल दान करने का विशेष महत्व है।

मौनी अमावस्या :- माघ अमावस्या के दिन मनाये जाने वाले इस त्योंहार को मनु स्मृति के लेखक आचार्य मनु के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है।
- उस दिन मौन रहकर व्रत किया जाता है। जिससे आत्मबल में वृद्धि होती है।

बसत पंचमी :- यह त्यौहार बसंत ऋतु के आगमन में माघ शुक्ल पंचमी के दिन मनाया जाता है। 
- इस पर्व के अधिदेवता भगवान कृष्ण है ।
• ब्रज क्षेत्र में यह त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है और राधा व कृष्ण लीलाएं आयोजित होती है।
- उस दिन रति व कामदेव की पूजा की जाती है तथा पीले रंग का विशेष महत्व है।
• इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है ।

माघ पूर्णिमा - 
- धार्मिक दृष्टि से माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। 
- यह स्नान पर्वो का अंतिम पर्व है।
- इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। • इसी दिन बेणेश्वर मेला (नवारापरा -इंगरपुर) आयोजित होता है।
•उस दिन दान देने का भी विशेष महत्व है।

                 फाल्गुन माह के त्यौहार
फाल्गुन माह के त्यौहार

महाशिवरात्री - फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी
• प्रमुख मेला - शिवाड़ (सवाई माधोपुर )
- उस दिन भगवान् शिव व पार्वती का विवाह |
- महाकाल के रूप में शिव ने अवतार लिया ।

होली ढुढ़ का पर्व :- बच्चे के जन्म होने पर उसी वर्ष से होली के पहले वाली एकादशी के दिन ( फाल्गुन शुक्ल एकादशी)ननिहाल पक्ष के द्वारा ढुंढ लायी जाती है।

होली का त्योंहार :- फाल्गुन पूर्णिमा ।
- उस दिन हिरण्यकश्यप की आज्ञा से भवत प्रहलाद के साथ बैठकर होलिका जल गई और प्रहलाद बच गये।

                 चैत्र माह के त्यौहार
चैत्र माह के त्यौहार
चैत्र माह के त्यौहार

धुलंडी का त्यौहार:- चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को घुलड़ी मनाई जाती है। 
- इस दिन प्रात:काल होलिका की राख की वंदना की जाती है। सभी रंग-गुलाल से खेलते हैं।
प्रमुख होलियाँ :-
● लठ्मार होली - महावीर जी (करौली)
● कोडामार होली - भिनाय (अजमेर)
● देवर भाभी की होली - ब्यावर (अजमेर)  
● कपड़ा फाड़ होली - पुष्कर , अजमेर

घुड़ला त्योहार :- चैत्र कृष्णा अष्टमी के दिन यह त्यौहार जोधपुर में घुडले खाँ की स्मृति में मनाया जाता है।
● महिलाएं कुम्हार के घर से छिद्रित मटका लाकर तालाब में विसर्जित करती है।
● इस त्यौहार पर चैत्र शुक्ल अष्टमी को मेला भरता है।

शीतला अष्टमी का त्यौहार :- यह त्यौहार चैत्र कृष्ण 8 की शीतला माता की पूजा करके मनाया जाता है।
• इस दिन ठण्डा भोजन किया जाता है जिसे बास्थोड़ा कहा जाता है। 
• इस दिन गाँवों में खेजड़ी को शीतला माता मानकर पुजा जाता है। 
● शील डुगरी (चाकसू -जयपुर) में इस दिन मेला भरता है।

नवरात्रा :- हिंदुओं का नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा मनाया जाता है।
- उसी दिन गुड़ी पड़वा का त्यौहार भी मनाया जाता
- ऐसा माना जाता है कि इस दिन को शुभ मानकर बहा्जी ने सृष्टि की रचना की थी।

अरुंधती :- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से तृतीया तक यह पर्व मनाया जाता है ।
• जन्म से जन्मांतर के वैधस्य दोष को दूर करने तथा स्त्रियाँ चरित्र उत्थान के लिए रखती है।

बसत्तीय नवरात्रा :- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक । 
• मां दुर्गा के रूपों की 9 दिनों तक पूजा ।

गणगौर का त्यौहार :- चैत्र शुक्ल तृतीय ।
- भगवान् शिव और पार्वती के अखंड प्रेम का पर्व है।
•गण - शिव , • गौर- पार्वती
- गणगौर पुजन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक किया जाता है। 
- विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु तथा अच्छे तर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती है।

● शाही गणगौर की सवारी - जयपुर ,उदयपुर ।

● धीगा गणगौर - उदयपुर , जोधपुर

● गुलाबी गणगौर - नाथद्वारा (राजसमंद)

● बिना ईसर की सवारी - जैसलमेर

राम नवमी :- भगवान् राम के जन्मदिवस के रूप में यह पर्व चैत्र शुक्ल नवमी के दिन मनाया जाता है।
- इस दिन रामायण का पाठ किया जाता है तथा सरयु नदी के स्नान का विशेष महत्व है।

हनुमान जयंती :- हनुमान जी के जन्म दिवस के रूप में पूर्णिमा को मनाया जाता है।
- उस दिन रामायण तथा हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है।
सालासर बालाजी का मेला - सालासर , (चुरू)

● मेहदीपुर बालाजी का मेला- दौसा

             वैशाख माह प्रमुख त्यौहार
वैशाख माह के त्यौहार

             वैशाख माह के त्योहर

आखातीज/अक्षय तृतीया :- कृषक 7 अनाज व हल की पूजा करने वैशाख तृतीया के दिन त्यौहार मनाते है तथा अच्छी वर्षा की कामना करने है ।
-इसी दिन त्रेतायुग व सतयुग का आरम्भ हुआ था।
- वर्ष भर में एकमात्र अबुजा सावा है अत: राजस्थान में इस दिन सर्वाधिक बाल विवाह होते हैं।
- बीकानेर नगर (1488 ) तथा आधुनिक मेड़ता (नागौर) की स्थापना उसी दिन हुई ।

पीपल पूर्णिमा :- यह वैशाख पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है. इसे बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है।
- इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है।
- यह भी एक अबूमे सावा का दिन है।

               ज्येष्ठ मास के प्रमुख त्यौहार
ज्येष्ठ माह के प्रमुख त्यौहार
ज्येष्ठ माह के प्रमुख त्यॏहार

वट सावित्री व्रत / बड़ अमावस्या :-
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन स्त्रियाँ अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखती है तथा वट सावित्री की कथा सुनी जाती है।
• वट या बरगद की पूजा करके पुत्र और पति की आरोग्यता की प्रार्थना करती है।

निर्जला एकादशी :- ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के दिन सूर्योदय से सूर्योस्त निर्जल रहकर व्रत किया जाता है ।

           आषाढ़ माह के प्रमुख त्यौहार
आषाढ़ के प्रमुख त्यौहार
आषाढ़ के प्रमुख त्यौहार

देवशयनी एकादशी :-
- आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन भगवान विष्णु 4 माह के लिए क्षीर सागर में निद्रावस्ता में चले जाते है। 
- इन 4 माह में किसी प्रकार का कोई मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है।

गुरु पूर्णिमा :- आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है ।
• उसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
• इस दिन गुरु पूजन होता है।

                श्रावण माह के प्रमुख त्यौहार
श्रावण माह के प्रमुख त्यौहार
श्रावण माह के प्रमुख त्यौहार

सावन सोमवार :- श्रावण माह के प्रत्येक सोमवार को शिव जी की पूजा व व्रत किया जाता है। उसे सुविधा सोमवार भी कहा जाता है।

मंगला गौरी पुजन :- श्रावण माह के प्रत्येक मंगलवार के दिन माँ गौरी पार्वती की पूजा व व्रत किया जाता है।

नाग पंचमी :- श्रावण कृष्ण पंचमी के दिन यह पर्व मनाया जाता है।
- यह नागों / सर्प का त्यौहार है। इस दिन सर्प की पूजा की जाती है।
- मंडोर (जोधपुर) में नाग पंचमी का मेला भरता है।

निडरी नवमी :- श्रावण कृष्ण नवमी के दिन सर्पों के आक्रमण से बचने के लिए नेवले की पूजा की जाती है। अत: इसे निडरी नवरी कहा जाता है।

हरियाली अमावस्या :- श्रावण अमावस्था के दिन हरियाली अमावस्या मनाई जाती है। 
• इस दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाया है।

● कल्प वृक्ष का मेला - माँगलियावास (अजमेर )

          मुस्लिम समाज के प्रमुख त्योंहार
मुस्लिम समाज के प्रमुख त्योंहार
मुस्लिम समाज के प्रमुख त्योंहार





हिजरी सन् :- हिजरी सन् मुस्लिम समाज का पंचांग है, जो चन्द्रमा पर आधारित होता है। उस सन् महला महिना मुहर्रम का होता है तथा अंतिम महीना जिलहिज माह होता है।
• हिजरी सन् 12 माह होते हैं

1. मुहर्रम 2.सकी उल सफर
3. रबी उल अव्वल।   4.रबी उलसानि
5. जमादि उल अबल  6.जमादि उलसानि 
7. रज्जब उल मुज्जबर 8. सावान
9. रमजान।            10.सव्बाल
11. जिल्हाद           12. जिलाहिद

- हिजरी सन् की अवधि 360 दिन या उससे कम होती है।

मोहर्रम :- यह मुसलमानों के हिजरी सन् का पहला महिना है, इस माह में हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन नै सत्य और इंसाक के लिए कर्बला के मैदान में सहादत पाई लेकिन धर्म विरोधियों के आगे अपना सिर नहीं झुकाया।
- इसी याद में मोहर्रम माह की 10 तारीख को यह पर्व मनाया जाता है ।
- इस दिन ताजिये निकाले जाते हैं, उन ताजियों को कर्बला के मैदान में दफनाया कराया जाता है।

ईद - उल - मिला - दुलनबी :- 
• इससे बारावफात का त्यौहार भी कहा जाता है ।
- रबी - उल - अव्वल माह की 12 तारीख मनाया जाता है। 
- यह त्यौहार हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है। - उसका जन्म 570 ईस्वी में मक्का स्थान पर हुआ। जगह-जगह जुलूस निकाले जाते हैं और उनकी जीवनी एवम् शिक्षाओं पर प्रकाश डाला जाता है। विशेष प्रार्थनाएं की जाती है।

उद - उल - फितर :- सबाल माह की पहली तारीख को मिठी ईद या सिवैया की ईद के रूप में यह त्यौहार मनाया जाता है।

→ ईद का शाब्दिक अर्थ खुशी या हर्ष होता है।

→ मुस्लिम लोग रमजान माह में 30 दिन रोजे रखने के बाद शुक्रिया के तौर पर यह त्यौहार मनाया जाता है।
- यह भाई- चारे का त्योहार है।

इदुलजुहा :- यह कुर्बानी का त्यौहार है , जिसे बकरा ईद भी कहा जाता है । जो जिहिद माह की 10 तारीख को मनाया जाता है।
- यह त्यौहार पैम्बर हजरत इब्राहिम द्वारा अपने लड़के हजरत ईस्माइल की अल्लाह की कुर्बानी देने की स्मृति में मनाया जाता है।
- उस माह में मुसलमान हज की यात्रा करते है।

शबे बारात :- यह त्यौहार सावान माह की 14 तारीख को शाम को मनाया जाता है।
- इसी दिन हजरत मोहम्मद साहब की आकाश में ईश्वर से मुलाकात है। 
• इस दिन मुसलगान लोग अपनी माफी और भूलों के लिए ख़ुदा से प्रार्थना करते है।

              सिक्ख समाज के प्रमुख त्यौहार 
सिक्ख समाज के प्रमुख त्यौहार
सिक्ख समाज के प्रमुख त्यौहार


लोहड़ी का त्योहार :- सिक्ख समाज में प्रतिवर्ष मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर 13 जनवरी को नई फसल आने व काटने की खुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है।

वैशाखी का त्यौहार :- सिक्ख समाज में प्रतिवर्ष13 अप्रैल को मनाया जाता है।
• सिक्खों के 10 वें गुरु गोविंद ने 13 अप्रैल 1699 ईस्वी आनंदपुर (रोपण -पंजाब) में खालसा पंथ की स्थापना की।

गुरु नानक जयंती :- गुरु नानक सिक्ख समाज के पूर्वतक थे। 
• कार्तिक पूर्णिमा के दिन उनकी जयंति मनाई जाती है।

गुरु गोविंद सिंह जयंती :- पौष शुक्ल सप्तमी ।
• सिक्खों के अंतिम व 10 वे गुरु ।
• उन्होंने गुरु परम्परा समाप्त करके खालसा पंथ सिक्खों का धार्मिक गुरु ग्रथ घोषित किया ।

          ईसाई समाज के प्रमुख त्यौहार
ईसाई समाज के प्रमुख त्यौहार
ईसाई समाज के प्रमुख त्यौहार

ईसाई समाज के प्रवर्तक ईसा मसीह का जन्म बैथलेहम नगर में 4 ईस्वी पूर्व में हुआ ।

ईसाई धर्म के दो मत है -
 1) प्रोटेस्टेट । 

2) रोमन कैथोलिक ।

क्रिसमस डे :- प्रतिवर्ष 25 दिसम्बर को ईसा मसीह के जन्म दिवस के रूप में यह पर्व मनाया जाता है।

नववर्ष दिवस :- ईस्वी सन् की पहली जनवरी को नव वर्ष का पर्व मनाया जाता है।

गुड फ्राइडे :- इस दिन ईसा मसीह को सूली पर लटकाया था। 
- ईस्टन के पूर्व वाले शुक्रवार को यह पर्व मनाया जाता है।

असेन्सन डे :- ईस्टर के 40 दिन बाद ईसा मसीह स्वेच्छा से पुन: स्वर्ग लौट गये । इस याद में यह पर्व मनाया जाता है।

नवरोज :- पारसियों के नववर्ष का प्रारम्भ नवरोज से होता है।

  सिंधी समाज के प्रमुख त्यौहार / पर्व
सिंधी समाज के प्रमुख त्यौहार / पर्व
सिंधी समाज के प्रमुख त्यौहार / पर्व

थदड़ी या बड़ी सातम :- सिंधी समाज में यह पर्व भाद्रपद कृष्णा सप्तमी को मनाया जाता है। इस दिन बास्योड़ा मनाते है तथा गर्म भोजन नहीं किया जाता है।

● थदड़ी उत्सव पर महिलाओं द्वारा पीपल के पेड़ पर चांदी की मूर्ति रखकर पूजन किया जाता है।

चालीहा महोत्सव :- सिंध प्रांत के बादशाह मृखशाह के जुल्मों से परेशान होकर सिंधी समाज के लोगों ने 40 दिनों तक व्रत किया और 41 वें दिन झुलेलाल का अवतार हुआ।
- इसी याद में प्रतिवर्ष सुर्य के कर्क राशि में आ जाने पर 16 जुलाई से 24 अगस्त तक चालीहा महोत्सव मनाया जाता है।

झूलेलाल जयंति :- सिंधी समाज के लोग झूलेलाल के जन्मदिन को चेटी चण्ड पर्व के रूप में भी मनाते है।
- सिंध प्रांत के थट्ठा नगर में चैत्र माह में झूलेलाल जी का जन्म हुआ उन्हें "वरुण का अवतार " माना गया ।

• झूलेलाल जी ने सिन्ध के अत्याचारी शासक मृखशाह के जूल्मों से लोगों की मुक्ति दिखाई थी।

असूचड़ पर्व :- सिंधी समाज में फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी के दिन भगवान् झूलेलाल जी अंतर्छान होने पर यह पर्व मनाया जाता है।

         जैन धर्म के प्रमुख त्यौहार / पर्व 
जैन धर्म के प्रमुख त्यौहार / पर्व
जैन धर्म के प्रमुख त्यौहार / पर्व 


जैन पर्वो का सम्बन्ध लौकिक जगत् ना होकर आत्मा से है। आत्म शुद्धि जैन धर्म के पर्वो की पहली विशेषता है।

- व्रत , उपवास, भक्ति, दर्शन , पूजन आदि से आत्मा के राग द्वेष आदि विकारों को दूर करने का प्रयत्न किया जाता है। जैन पर्व आत्मजयी बनने की प्रेरणा देते हैं ।

दशलक्षण पर्व :- प्रतिवर्ष चैत्र, भाद्रपद , और माघ माह की शुक्ल पंचमी से पूर्णिमा तक दिगम्बर जैन समाज में मनाया जाता है।
- यह पर्वे किसी व्यक्ति से सम्बंधित ना होकर आत्मा के गुणों से सम्बन्ध रखता है।

सोलह कारण :- भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा से आश्विन कृष्ण प्रतिपदा तक सोलह कारण उत्सव मनाया जाता है। 
- उन दिनों सोलह भावनाओं का अनुचितंन किया जाता है। इसके स्वरूप का अध्ययन करके व्रत किया जाता है।

पर्युषण पर्व :- जैन धर्म का महापर्व ।
• शाब्दिक अर्थ - निकट बसना ।
• दिगम्बर - भाद्रपद शुक्ल 3 से चतुर्दशी ।
• श्वेताम्बर - भाद्रपद कृष्ण 12 से भाद्रपद शुक्ल 5 ।
- जैन धर्म के लोग आपस में अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना भी करते हैं।

ऋषभदेव जयंति - चैत्र कृष्ण नवमी ऋषभ जयंती पर्व मनाया जाता है ।
- उस दिन जैन धर्म तीर्थकर भगवान् आदिनाथ / ऋषभदेव का जन्म हुआ था।

- इस दिन ऋषणदेव मंदिर - धुलैव , उदयपुर में मेला भरता है।

महावीर जयंति :- चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को जैन धर्म के 24वे तीर्थकर महावीर स्वामी के जन्मदिन की याद में यह पर्व मनाया जाता है।
- उस दिन करौली में महावीर जी के मंदिर में मेला भरता है।

सुगंध दशमी पर्व  :- यह पर्व भाद्रपद शुक्ल दशमी को जैन मंदिरों सुगन्धित द्रव्यों से सुगन्ध कर मनाया जाता है।

रोट तीज - जैन धर्म में यह पर्व भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। जिसमे खीर और मिस्सी रोटियाँ बनाई जाती है।

पड़वा ढोक :- जैन धर्म में दिगम्बर परम्परा में यह एक क्षमायाचना का पर्व है जो आश्विन कृष्ण प्रतिपदा को मनाया जाता है।


हमें आशा है कि यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी । अगर हमारे द्वारा किया गया यह कार्य आपको अच्छा लगता है तो हमें इसे शेयर करके सपोर्ट जरूर करें । 

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
एक टिप्पणी भेजें (0)