राजस्थान की लोक देवियां । Rajasthan ke lok Deviya . sk notes hub .

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इस पोस्ट के माध्यम से हम राजस्थान की विभिन्न लोक देवियों के बारे में जानने का प्रयास करेंगे । राजस्थान में लोक देवियां को लेकर अनेक मान्यताएं रही है तथा राजस्थान के राजवंशों की कुलदेवी के रूप में लोग देवियों को पूजा जाता था । लोक देवियों के संबंध में राजस्थान में आज भी किस्से  लोगों से सुने जा सकते हैं ।
राजस्थान की लोक देवियां
राजस्थान की लोक देवियां 

इस पोस्ट के माध्यम से हम निम्न लोक देवियों के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे - 
करणी माता, कैला देवी , नागणेची माता , शीतला माता, जीण माता , दाधि माता , शीला देवी , सकराय माता , आशापुरा माता , रानी सती , आवड़ माता , सच्चियाय माता , पथवारी माता , आवड़ माता , तनोट माता , बाण माता , रानी सती इत्यादि । 

     तनोट माता     

इनका मंदिर तनोट नामक स्थान जैसलमेर जिले में भारत-पाकिस्तान की सीमा के नजदीक है ।
• सन् 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इस मंदिर पर कई गोले दागे गए थे परंतु वह विस्फोटक नहीं हुए से थे इस कारण यह माना जाता है कि तनोट माता ने सैनिकों की युद्ध में मदद की थी । 
• इस मंदिर में पूजा का कार्य भारतीय सेना बीएसएफ के जवान करते हैं ।
• तनोट माता को युद्ध के देवी के नाम से भी जाना जाता है । 

     करणी माता      

• इनका मंदिर देशनोक गांव , नोखा तहसील , बीकानेर जिले में स्थित है ।
• इनको "सफेद चूहा की देवी " भी कहा जाता है करणी माता के मंदिर में सफेद चूहे पाए जाते हैं जिन्हें " काबा " कहा जाता है ।
• यह बीकानेर के राठौड़ वंश की कुलदेवी है ।
• करणी माता का जन्म 1387 ईस्वी में पिता मेंहाजी तथा माता देवल बाई के घर हुआ था ।
• इनका बचपन का नाम रितु / रिद्धु बाई था ।
• चैत्र व अश्विन माह के नवरात्रों में इनके मंदिर में भव्य मेले का आयोजन होता है । 

       राणी सती       

इनका मूल नाम नारायणी बाई था । 
राणी सती को दादीजी के नाम से भी जाना जाता है ‌।
झुंझुनू जिले में इनका विशाल मंदिर बना हुआ है ।
भाद्रपद कृष्ण अमावस्या को झुंझुनू जिले में राणी सती का मेला आयोजित होता है। 

      कैला देवी      

करौली जिले में त्रिकूट पर्वत की घाटी में कैला देवी का मंदिर स्थित है।
• यह करौली के यादव वंश की कुलदेवी मानी जाती है ।
चैत्र शुक्ल अष्टमी को कैला देवी मेला आयोजित होता है तथा इसमें लांगुरिया गीत गाए जाते हैं ।

       जीण माता      

हर्ष की पहाड़ी रेवासा गांव सीकर जिले में जीण माता का मंदिर बना हुआ है। 
• राजस्थानी लोक साहित्य में सबसे लंबा गीत जीण माता का है।
• जीण माता चौहान कुल की इष्ट देवी भी है ।
 चैत्र व अश्विन माह के नवरात्रों में इनके मंदिर में भव्य मेले का आयोजन होता है । 

    बाण माता    

• चित्तौड़गढ़ दुर्ग में इनका मंदिर बना हुआ है तथा यह मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश की कुलदेवी है ।

  स्वांगिया माता   

 यह जैसलमेर के भाटी वंश की कुलदेवी है ।

      नागणेची माता      

मारवाड़ के शासक राव धूहड़ ने कर्नाटक से चक्रेश्वरी देवी की मूर्ति लाकर नागाणा गांव, बाड़मेर में स्थापित की जो बाद में चलकर नागणेची माता के रूप में जाना जाने लगी ।
• यह मारवाड़ के राठौड़ वंश की कुलदेवी है। 
बीकानेर के निकट 18 भुजाओं की नागणेची माता की प्रतिमा है जो बीकानेर के शासक राव बीका के द्वारा बनाई गई थी ।

      आई माता       

इनका मंदिर बिलाड़ा जोधपुर में स्थित है जहां पर प्रत्येक महीने की शुक्ला 2 विशेष पूजा अर्चना की जाती है ।
यह सीरवी जाति के कुलदेवी मानी जाती है तथा सीरवी जाति के लोग आई माता के मंदिर को दरगाह कहते हैं ।
इनके समाधि स्थल को बडेर का जाता है तथा इनकी कोई मूर्ति स्थापित नहीं है ।
आई माता के गुरु का नाम रैदास है ।

      दाधिच माता      

गोट - मांगलोद , जायल तहसील , नागौर जिले में इनका मंदिर है ।
दाधिच ब्राह्मणों की कुलदेवी मानी जाती है ।
 नवरात्र में यहां पर भव्य मेले का आयोजन होता है ।

     शीतला माता       

• चाकसू , जयपुर में शीतला माता का मंदिर है तथा इनकी खंडित रूप में पूजा की जाती है ।
• शीतला माता का मेला चैत्र कृष्ण अष्टमी को लगता है ।
• चेचक के प्रकोप से बचने के लिए शीतला माता की पूजा की जाती है ।
• चैत्र कृष्ण सप्तमी को घरों में विभिन्न प्रकार के भोजन बनाए जाते हैं तथा चैत्र कृष्णा अष्टमी को घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है तथा ठंडा भोजन किया जाता है कुछ ठंडे भोजन को बास्योडा कहा जाता है ।

     शीला देवी       

• यह आमेर के कछवाहा राजवंश की कुलदेवी है।
• इनका मंदिर आमेर, जयपुर में स्थित है ।
• वर्तमान का मंदिर का निर्माण मानसिंह द्वितीय ने करवाया था। 
• नवरात्रा में छठ व अष्टमी पर मेला आयोजित होता है।

      सच्चियाय माता      

• यह ओसवालो वालों की कुलदेवी मानी जाती है ।
• ओसिया , जोधपुर में इनका का मंदिर स्थित है ।
• इनका प्राचीन मंदिर आठवीं से नौवीं शताब्दी का है तथा वर्तमान का मंदिर जिसे 12वीं शताब्दी में बनाया गया है 


    नारायणी माता    

यह मंदिर प्रतिहार शैली में निर्मित है ।
• यह नाई जाति की कुलदेवी है । 
• राजगढ़ , अलवर जिले में इनका मंदिर स्थित हैं ।

      सकराय माता      

• इनका मंदिर सीकर जिले में स्थित है ।
• सकराय माता के मंदिर में 2 देवियां शाकंभरी और काली की मूर्तियां स्थापित है ।

     पथवारी माता     

• इनका मंदिर गांव के बाहर जाने वाले मार्ग पर स्थापित होता है ।
• तीर्थ यात्रा पर जाते समय तथा वापिस लौटते समय इनकी पूजा की जाती है।

    आशापुरा माता     

यह जालौर के चौहान शासकों की कुलदेवी है ।
• मुदरा ग्राम , जालौर जिले में इनका मंदिर स्थित है ।
• पाली जिले के नाडोल में भी आशापुरी माता का मंदिर है । 
• होली के तीसरे दिन यहां पर मेला आयोजित होता है ।

    भदाणा माता     

•  कोटा के भदाणा नामक स्थान पर इनका मंदिर स्थित है ।
• इनको तांत्रिक क्रिया से बचाने के लिए पूजा जाता है ।

    आवड़ माता    

• जैसलमेर जिले में इनका मंदिर स्थित है।
• चारण देविया या तेमड़ताई के नाम से भी जाना जाता है ।

     जमुवाय माता    

यह ढूंढाड़ के कच्छवाह वंश की कुलदेवी है ।

      बड़ली माता      

• अकोला, चित्तौड़गढ़ इनका मंदिर स्थित है ।
• यह मंदिर बेड़च नदी के किनारे स्थित है ।
• नवरात्र में यहां पर मेला लगता है ।

     सुगाली माता        

इसे 1857 क्रांतिकारी देवी के रूप में माना जाता है ।
• आउवा का किला पाली में 10 सिर तथा 54 भुजाओ की मूर्ति सुगाली माता की थी परंतु वर्तमान में यह बागड़ संग्रहालय पाली जिले में संरक्षित है ।

      छीक माता    

जयपुर में इनका मंदिर स्थित है ।
• इनकी पूजा माघ शुक्ल सप्तमी को की जाती है ।

   विरात्रा माता    

इनका मंदिर चौहटन बाड़मेर में स्थित है तथा नवरात्रा में उनकी पूजा की जाती है ।

      अर्बुदा देवी       

इनका मंदिर माउंट आबू सीकर जिले में स्थित है इनको राजस्थान की वैष्णो देवी कहा जाता है ।

  राजस्थान की प्रमुख अन्य देवियां तथा उनका स्थान  

• गोरनिया देवी - कोटा , एकमात्र देवी जिनकी सवारी हाथी ।
जिलाणी माता - अलवर
चामुंडा माता - जोधपुर
• ईडाणा माता - उदयपुर
हर्षद माता - आभानेरी , दौसा
• हिचकी माता - सवाई माधोपुर
• स्वांगिया माता - जैसलमेर
• बाहा्णी माता - बारां
• चारभुजा देवी - खमनोर, राजसमंद
• अंबिका माता - उदयपुर
• त्रिपुर सुंदरी - तलवाड़ा , बांसवाड़ा
• राणी भटियाणी - जसोल , बालोतरा
• सुंधा माता - भीनमाल , जालौर
• चौथ माता - सवाई माधोपुर
• घेवर माता - राजसमंद
• रसिया बालम मंदिर - दिलवाड़ा , सिरोही

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