•हवेली स्थापत्य कला राजस्थान की स्थानीय कला है | जिसका उद्भव 17-18 वीं शताब्दी में राजस्थान के सेठ-साहूकारों और मंत्री वर्ग के कारण हुआ।
• ड्योढी :- हवेली के मुख्य दरवाजे के प्रवेश मार्ग के सामने खडी दीवार का हिस्सा।
• पोल :- मुख्य द्वार के अन्दर बनी हुई खुली जगह |
• तिबारा :- चौक के तीनों ओर बने कमरों का हिस्सा।
• गवाक्ष :- हवेली के मुख्य द्वार पर मंदिरों के बाहर बने चबूतरे जैसे दोनों ओर ऊँचे-ऊँचे चबुतरेनुमा संरचना |
• पेड़ियां / नाल :- बरामदे में से ऊपर जाने की सिढ़िया |
• मेड़ी अथवा मालियां :- ऊपर की मंजिल में बने सुन्दर अलंकृत कमरे ।
• पेढी / पेड़ी :- पोल में बना अलंकृत कमरा जहां पुरुषों की बैठक होती है ।
• ओवरी :- हवेली में कमरे के अन्दर बने गहन अंधकारयुक्त कमरे ।
• झरोखा :- मुख्य द्वार के ऊपर बाहर की ओर निकली हुई मेहराबदार नकाशीयुक्त बालकनी ।
• चौक :- पोल के आगे मुख्य भवन के मध्य खुला प्रांगण और खुला बरामदा ।
• साल :- हवेली के अन्दर बने सुन्दर भित्ति चित्रयुक्त बंद कमरे ।
• छज्जा जीना :- ऊपर की मंजिल में बाहर की ओर निकली मेहराबयुक्त बालकनी ।
नथमल की हवेली - जैसलमेर
• निर्माण - जैसलमेर में स्थित नथमल की का निर्माण दो लालू और हाथी ने करवाया ।
पटवों की हवेली - जैसलमेर
• पत्थर की जाली एवं कटाई कारण विश्व प्रसिद्ध हवेली ।
• मंजिल-पाँच मंजिला इमारत ।
• निर्माण :- जैसलमेर के व्यावसायिक 'गुमानचंद बाफना' ने कराया ।
• सिंध, भारत, मुगल एवं यहूदी शैलियों का मिश्रण ।
पुष्य हवेली - जैसलमेर
• निर्माण - जसवंत सिंह द्वितीय के कामदार पुष्करणा ब्राह्मण रघुनाथमल जोशी उर्फ भूरजी द्वारा।
• विश्व की ज्ञात एकमात्र ऐसी हवेली जिसका निर्माण एक ही नक्षत्र पुष्य में किया गया ।
सालिमसिंह की हवेली - जैसलमेर
निर्माण - सालिमसिंह ने करवाया।
• नौ मंजिला हवेली।
• सात मंजिल पंत्थर की, आठवीं मंजिल (रंगमहल) एवं नवीं मंजिल शीशमहल लकड़ी की बनी हुई है ।
• वर्तमान में सालिमसिंह की ऊपरी मंजिल मोती महल / जहाज महल के नाम से जानी जाती है ।
• सालिमसिंह की हवेली को ही 'कमल महल एवं रूपमहल' के नाम से जाना जाता है ।
बागौर की हवेली (उदयपुर)
• इस हवेली में विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी रखी हुई है ।
• निर्माण - मेवाड़ के प्रधान मंत्री ठाकुर अमरचंद बड़वा द्वारा निर्मित ।
• 138 कमरे ।
• 1986 में यहाँ पर पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंन्द्र को स्थापित किया ।
मालजी का कमरा - चुरू
निर्माण - मालचंद कोठारी द्वारा निर्मित।
• आंतरिक भाग सोने-चाँदी की सुन्दर नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
राजस्थान की प्रसिद्ध हवेलियाँ
1) जयपुर
• रत्नाकार भट्ट पुण्डरीक की हवेली ।
• चूरसिंह की हवेली ।
• पुरोहितजी की हवेली ।
2) जोधपुर :-
• बड़े मियाँ की हवेली ।
• पच्चिसां हवेली ।
• लालचंद ढड्ढा की हवेली ।
• सांगीदास थानवी की हवेली ।
• मोतीलाल अमरचंद कोचर की हवेली ।
• फूलचंद गोलछा की हवेली ।
• राखी हवेली ।
• पोकरण हवेली ।
• पाल हवेली ।
• आसोप हवेली ।
3) जैसलमेर
• राव राजा बर्सलपुर की हवेली ।
• पटवों की हवेली ।
• सोढ़ों की हवेली ।
• दीवान आचार्य ईसरलालजी की हवेली ।
4) झुंझुनू
• सेठ जयदयाल केड़िया की हवेली - बिसाऊ ।
• नाथूराम पोद्दार की हवेली - बिसाऊ ।
• सीताराम सिगतिया की हवेली - बिसाऊ ।
• भगतों की हवेली - नवलगढ़ ।
• भगोरिया की हवेली - नवलगढ़ ।
• पोद्दार की हवेली - नवलगढ़ ।
• लालधर जी धरकाजी की हवेली - नवलगढ़ ।
• रामदेव चौथाणी की हवेली - मण्डावा ।
• सागरमल केडिया की हवेली - मण्डावा ।
• ईसरदास मोदी की हवेली ।
• टीबड़े वाला की हवेली ।
• सोने, चांदी की हवेली - महनसर ।
• बिरला हवेली - पिलानी ।
• खीचन की हवेली ।
5) सीकर
• रोनेड़ी वालों की हवेली - लक्ष्मणगढ़ |
• खेमका सेठों की हवेली - रामगढ़ |
• गोयनका सेठों की हवेली - रामगढ़ |
• पौददारों की हवेली - रामगढ़ |
• बैजनाथ रूइया हवेली - रामगढ़ |
• पंसारी की हवेली - श्रीमाधोपुर |
• केड़ियां की हवेली - लक्ष्मणगढ़ |
• राठी की हवेली - लक्ष्मणगढ़ |
• बिनाणियों की हवेली |
• नई हवेली- सीकर |
6) बीकानेर
• रामपुरिया हवेलियाँ - बीकानेर मुगल, हिंदु और यूरोपीय कला का समन्वय।
• अधिकांश लाल पत्थरों का उपयोग हुआ |
• बच्छावतों की हवेली |
• मोहता हवेली |
•डागा हवेली |
•कोठारी हवेली |
7) चितौडगढ़
• जयमल व पत्ता की हवेलियाँ ।
• भामाशाह की हवेली ।
• सलूम्बर ठिकाने की हवेली ।
8) उदयपुर
• बाफना की हवेली
• मोहनसिंह जी की हवेली ।
• बागौर हवेली |
• पीपलियाँ की हवेली ।
9) चुरू
• मंत्रियों की हवेली ।
• सुराणों की हवेली |
• रामनिवास गोयनका की हवेली ।
10) कोटा
• बडे देवता की हवेली ।
• झालाजालिम सिंह जी की हवेली ।
11) सुनहरी कोठी हवेली - टोंक ।
12) केसरी सिंह बारहठ की हवेली - शाहपुरा (भीलवाड़ा) ।
