घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम 2005 ।

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उद्देश्य :- घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण करना । 

लागू :- 26 अक्टूबर 2006

घरेलू हिंसा की परिभाषा :- किसी भी महिला के साथ किए गए किसी भी प्रकार का शारीरिक मानसिक आर्थिक या लैंगिक दुर्व्यवहार / किसी भी प्रकार का शोषण जिससे महिला की गरिमा का उल्लंघन अपमान या तिरस्कार हो यह सभी घरेलू हिंसा की श्रेणी में आते हैं । 

• ऐसे अधिनियम में 5 अध्याय एवं 37 धाराएं शामिल है ।

• इस कानून के तहत पीड़ित किसी भी राहत के लिए आवेदन कर सकती हैं ।

अध्याय 1 :- प्रस्तावना । धारा 1 एवम् 2 शामिल ।

अध्याय 2 :- घरेलू हिंसा की परिभाषा । धारा 3 ।

अध्याय 3 :- संरक्षण अधिकारी / सेवा प्रदाता के अधिकार एवं कर्तव्य । धारा 4 से 10 ।

अध्याय 4 :- राहत / न्याय के आदेश की प्रक्रिया । धारा 12 से 29 । 

अध्याय 5 :- विविध । धारा 30 से 37 ।

• इस कानून के तहत याचिका करने के लिए एक प्रारूप है जिसका नाम घरेलू घटना रिपोर्ट है । 

जिसको भरकर  संरक्षण अधिकारी / सेवा प्रदाता या पुलिस के पास जमा करवाया जा सकता है।

• इस कानून के अंतर्गत पीड़ित निशुल्क कानूनी सहायता की मांग कर सकती है ।

• महिला अधिनियम की धारा 12 के तहत संरक्षण एवं उपचार हेतु मजिस्ट्रेट में आवेदन कर सकती हैं ।

•महिला अधिनियम की धारा 18 से 22 तक इसके अंतर्गत घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला का संरक्षण, निवास, आर्थिक सहायता, प्रतिकर के बारे में आदेश दिया जाता है । 

इस कानून के अंतर्गत दिए गए संरक्षण आदेशों का उल्लंघन होने पर (धारा 31 के अंतर्गत ) प्रतिवाद को 1 साल तक की जेल या ₹20000 तक का जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं ।

• इस अधिनियम के तहत कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज करवा सकता है ।

इस अधिनियम के अंतर्गत यह प्रावधान है कि पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए अपराधी के खिलाफ 30 दिन के अंदर कार्रवाई करना तथा 60 दिन के भीतर उस कार्रवाई का निस्तारण करना अनिवार्य है ।

घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम की प्रमुख धाराएं एवं उनके प्रावधान  

धारा 3 :- घरेलू हिंसा की परिभाषा ।

धारा 4 :- घरेलू हिंसा की जानकारी संरक्षण अधिकारी को प्रदान करना । 

धारा 5 :- संरक्षण अधिकारी के द्वारा महिला को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी प्रदान करना ।
 
धारा 8 :- संरक्षण अधिकारी । 

धारा 10 :- सेवा प्रदाता । 

• सेवा प्रदाता :- अधिनियम के अंतर्गत गैर सरकारी संगठन जिसको यह जिम्मेदारी दी जाती है कि वह पीड़िता की आश्रय , चिकित्सा , वैधानिक सलाह एवं पुनर्वास में सहायता प्रदान करें । 

धारा 12 :- केस करने के 3 दिन के भीतर सुनवाई तय करना तथा 60 दिन के अंदर उसे पूरा करना ।

धारा 14 :- सेवा प्रदाता से परामर्श लेना ।

धारा 16 :- यदि पक्षकार चाहे तो सुनवाई बंद कमरे में भी की जा सकती है । 

धारा 17 & 18 :- संयुक्त निवास प्राप्त करने का अधिकार । 

धारा 19 :- महिला एवं उनके बच्चों को भरण पोषण का अधिकार । 

धारा 20 :- क्षतिपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार । 

इस अधिनियम के अंतर्गत महिलाओं के 4 प्रकार के दुर्व्यवहार का उल्लेख किया गया है - 
1) शारीरिक दुर्व्यवहार ।
2) मानसिक दुर्व्यवहार ।
3) लैंगिक दूव्यवहार ।
4) आर्थिक हिंसा । 

नोट :- इस अधिनियम का उल्लंघन होने पर धारा 354 के तहत कार्रवाई की जा सकती है । 

नोट :- इस अधिनियम के अंतर्गत किसी महिला को गैर वैधानिक मांग को पूरा करने के लिए उत्पीड़ित किया जाता है तो घरेलू हिंसा माना जाएगा । 
जैसे - दहेज मांगना ‌।

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